अब माँ-बाप की ज़िम्मेदारी क्या सिर्फ बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करने तक ही रह गई है?

 

अब माँ-बाप की ज़िम्मेदारी क्या सिर्फ बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करने तक ही रह गई है?


आज कई बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उसी परिवार और उन माता-पिता को नज़रअंदाज़ करने लगते हैं, जिन्होंने अपना सब कुछ त्यागकर उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।


याद रखिए, सफलता की असली पहचान केवल ऊँचा पद या पैसा नहीं, बल्कि अपने माता-पिता और परिवार के प्रति सम्मान अपनापन और ज़िम्मेदारी निभाना भी है


माँ-बाप का सम्मान कीजिए, क्योंकि उनके त्याग का कोई विकल्प नहीं होता KDL news

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